आज आज़ादी को उनहत्तर साल पूरे हुए हैं । देश में जश्न का माहौल होना चाहिए। आज़ादी है भई ! आसानी से थोड़े ही मिलती है। और फिर बात भी हो रही है तो "भारत" की आज़ादी की । ऐसा देश जिसे प्रगतिशील देशों में एक युवा देश के रूप में देखा जाता है । और फिर जब युवा ही देश में बहुसंख्यक हों तो आज़ादी की बात पर जश्न मनना तो बनता है । ऐसे युवा जिन्हें देश की महानता पर कोई शक या शंका नहीं है, और न ही शंका है अपनी आज़ादी पर। फिर भी कुछ चीजें मजबूर करती हैं ये सोचने पर कि आखिर आज़ादी है क्या?
क्या सड़क पर पान की पिचकारी मार पाना आज़ादी है? या दूसरों को पिचकारी मारने से मना करना आज़ादी है? या दूसरों की पिचकारी को विवश होकर झेलना आज़ादी है?
क्या चौराहे पर यातायात सिग्नल का पालन करना आज़ादी है ? या सिग्नल को तोड़ देना आज़ादी है? या सिग्नल का पालन कर रहे व्यक्ति के पीछे खड़े होकर बार बार हॉर्न बजा कर उसे सिग्नल तोड़ने के लिए विवश करना आज़ादी है?
क्या उसी सिग्नल पे छोटे बच्चे को फटे हाल स्थिति में अखबार बेचते देखना आज़ादी है ? या उस बच्चे के द्वारा अखबार बेचा जाना आज़ादी है ? या उस बच्चे का पढ़ने-लिखने की उम्र में पेट भरने के लिए ऐसे काम करने को विवश होना आज़ादी है ?
क्या उसी अखबार में छपी एक बाढ़ की खबर को पढ़ना और उसे नज़रअंदाज़ कर देना आज़ादी है ? या उस बाढ़ को इसलिए नज़रअंदाज़ करना क्योंकि उसे दूरदर्शन पर नहीं दिखाया गया, आज़ादी है ? या समाचार चैनलों का उस खबर को तूल ही न देना आज़ादी है ?
क्या उसी समाचार चैनल पर, चैनल द्वारा कुछ लोगों की चिल्ला-चोट को प्रसारित कर पाना आज़ादी है ? या उस चिल्ला-चोट में भाग लेने वालों का आपस में हाथापाई कर पाना आज़ादी है ? या उन चैनलों पर समाचारों के स्थान पर सास बहु और साज़िशों के बारे में देखना, दिखाना आज़ादी है ?
क्या उसी टी.वी. के किसी चैनल पर अंधविश्वासों से भरा कोई कार्यक्रम देखना आज़ादी है ? या उस चैनल का उस कार्यक्रम को प्रसारित कर पाना आज़ादी है ? या उस कार्यक्रम को देखकर अन्धविश्वास जाग्रत करना आज़ादी है ?
क्या उन अंधविश्वासों से प्रेरित होकर उनका पालन करना आज़ादी है ? या उन अंधविश्वासों का विरोध करने वाले किसी व्यक्ति की हत्या करना आज़ादी है ? या उस व्यक्ति की हत्या के विरोध में दिए हुए सम्मान को लौटना आज़ादी है ?
क्या सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त कर पाना आज़ादी है ? या उन विचारों से आहात होकर विचार व्यक्त करने वाले को हवालात की सैर करवाना आज़ादी है ? या बिना किसी ताथ्यिक पुष्टि के सोशल मीडिया पर किसी भी पोस्ट को सच मान लेना आज़ादी है ?
क्या उसी सोशल मीडिया पर चिर-विरोधी नेताओं का एक दूसरे की भर्त्सना कर पाना आज़ादी है ? या उन नेताओं के कार्य क्षेत्र में उनका विरल ही शक्ल दिखाना आज़ादी है ? या उन नेताओं का साधारण जनता को रिश्वत देने के लिए विवश करना आज़ादी है ?
क्या उन नेताओं का संवाददाताओं द्वारा पर्दाफाश कर पाना आज़ादी है? या उन संवाददाताओं द्वारा सत्य को छुपा पाना आज़ादी है? या उन संवाददाताओं द्वारा बाढ़ पीड़ितों से संवेदनहीन होकर पूछना कि "आप कैसा महसूस कर रहे हैं ?" आज़ादी है?
क्या सेना के प्रयासों का श्रेय नेताओं के द्वारा ले लिया जाना आज़ादी है? या सेना के द्वारा मारे गए आतंकी की मौत पर जनता का मातम मनना आज़ादी है? या मातम मनाते हुए, जाना द्वारा सेना पर ही पथराव कर देना आज़ादी है?
क्या धर्म के नाम पर देश को माँ का दर्ज़ा न देना आज़ादी है? या देशभक्ति के भाव को पूर्णतया एक ही वाक्यांश से जोड़कर देखना आज़ादी है? या उसपर धार्मिक सियासत खेलना आज़ादी है ?
क्या किसी पशु विशेष का मांस खा पाना आज़ादी है ? या उस पशु विशेष के मांस को ग्रहण करने वाले को स्वायत्त होकर मृत्यु दंड दे देना आज़ादी है ? या किसी पशु विशेष को धर्म से जोड़ना आज़ादी है ?
और हाँ.... स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं....... :D
-ऐश्वर्य
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कुछ प्रश्न.....
क्या सड़क पर पान की पिचकारी मार पाना आज़ादी है? या दूसरों को पिचकारी मारने से मना करना आज़ादी है? या दूसरों की पिचकारी को विवश होकर झेलना आज़ादी है?
क्या चौराहे पर यातायात सिग्नल का पालन करना आज़ादी है ? या सिग्नल को तोड़ देना आज़ादी है? या सिग्नल का पालन कर रहे व्यक्ति के पीछे खड़े होकर बार बार हॉर्न बजा कर उसे सिग्नल तोड़ने के लिए विवश करना आज़ादी है?
क्या उसी सिग्नल पे छोटे बच्चे को फटे हाल स्थिति में अखबार बेचते देखना आज़ादी है ? या उस बच्चे के द्वारा अखबार बेचा जाना आज़ादी है ? या उस बच्चे का पढ़ने-लिखने की उम्र में पेट भरने के लिए ऐसे काम करने को विवश होना आज़ादी है ?
क्या उसी अखबार में छपी एक बाढ़ की खबर को पढ़ना और उसे नज़रअंदाज़ कर देना आज़ादी है ? या उस बाढ़ को इसलिए नज़रअंदाज़ करना क्योंकि उसे दूरदर्शन पर नहीं दिखाया गया, आज़ादी है ? या समाचार चैनलों का उस खबर को तूल ही न देना आज़ादी है ?
क्या उसी समाचार चैनल पर, चैनल द्वारा कुछ लोगों की चिल्ला-चोट को प्रसारित कर पाना आज़ादी है ? या उस चिल्ला-चोट में भाग लेने वालों का आपस में हाथापाई कर पाना आज़ादी है ? या उन चैनलों पर समाचारों के स्थान पर सास बहु और साज़िशों के बारे में देखना, दिखाना आज़ादी है ?
क्या उसी टी.वी. के किसी चैनल पर अंधविश्वासों से भरा कोई कार्यक्रम देखना आज़ादी है ? या उस चैनल का उस कार्यक्रम को प्रसारित कर पाना आज़ादी है ? या उस कार्यक्रम को देखकर अन्धविश्वास जाग्रत करना आज़ादी है ?
क्या उन अंधविश्वासों से प्रेरित होकर उनका पालन करना आज़ादी है ? या उन अंधविश्वासों का विरोध करने वाले किसी व्यक्ति की हत्या करना आज़ादी है ? या उस व्यक्ति की हत्या के विरोध में दिए हुए सम्मान को लौटना आज़ादी है ?
क्या सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त कर पाना आज़ादी है ? या उन विचारों से आहात होकर विचार व्यक्त करने वाले को हवालात की सैर करवाना आज़ादी है ? या बिना किसी ताथ्यिक पुष्टि के सोशल मीडिया पर किसी भी पोस्ट को सच मान लेना आज़ादी है ?
क्या उसी सोशल मीडिया पर चिर-विरोधी नेताओं का एक दूसरे की भर्त्सना कर पाना आज़ादी है ? या उन नेताओं के कार्य क्षेत्र में उनका विरल ही शक्ल दिखाना आज़ादी है ? या उन नेताओं का साधारण जनता को रिश्वत देने के लिए विवश करना आज़ादी है ?
क्या उन नेताओं का संवाददाताओं द्वारा पर्दाफाश कर पाना आज़ादी है? या उन संवाददाताओं द्वारा सत्य को छुपा पाना आज़ादी है? या उन संवाददाताओं द्वारा बाढ़ पीड़ितों से संवेदनहीन होकर पूछना कि "आप कैसा महसूस कर रहे हैं ?" आज़ादी है?
क्या सेना के प्रयासों का श्रेय नेताओं के द्वारा ले लिया जाना आज़ादी है? या सेना के द्वारा मारे गए आतंकी की मौत पर जनता का मातम मनना आज़ादी है? या मातम मनाते हुए, जाना द्वारा सेना पर ही पथराव कर देना आज़ादी है?
क्या धर्म के नाम पर देश को माँ का दर्ज़ा न देना आज़ादी है? या देशभक्ति के भाव को पूर्णतया एक ही वाक्यांश से जोड़कर देखना आज़ादी है? या उसपर धार्मिक सियासत खेलना आज़ादी है ?
क्या किसी पशु विशेष का मांस खा पाना आज़ादी है ? या उस पशु विशेष के मांस को ग्रहण करने वाले को स्वायत्त होकर मृत्यु दंड दे देना आज़ादी है ? या किसी पशु विशेष को धर्म से जोड़ना आज़ादी है ?
हम आज़ाद हैं..... सच में ???
"हम आज़ाद हैं" बोलना आसान है, और सुनने में भी अच्छा भी लगता है। लेकिन ये वाक्य २ प्रश्न उठता है। जिसमे से एक के "उत्तर" में ऊपर कुछ प्रश्न आप पढ़ ही चुके हैं, और जो दूसरा प्रश्न है, वो है कि "हम" में कौन आता है?
भौतिक रूप से हर भारतवासी परतंत्र नहीं है । भारत एक स्वतंत्र देश है ।और इसी परिभाषा से हर भारतवासी स्वतंत्र देश का नागरिक है। लेकिन आज़ादी कभी भी केवल भौतिक नहीं हो सकती। आज़ादी व्यक्ति के मन से होती है, और विचारों से भी। वैचारिक आज़ादी के बगैर यदि कोई मनुष्य स्वयं को आज़ाद मानता है, तो यह केवल एक विरोधाभास से बढ़कर और कुछ नहीं।
परतंत्र होने के पहले हमारे पास भौतिक रूप से आज़ादी तो थी और वैचारिक रूप से भी। लेकिन इन दोनों के हनन के पश्चात और आज़ादी के लिए पुनः लड़ने के उपरांत जो आज़ादी हमारे लिए हमारे देश के बलिदानी वीरों ने जीती उसे हमने केवल भौतिकता की जंजीरों में जकड़ा हुआ छोड़ दिया है, और वैचारिक स्वतंत्रता से देश का आम नागरिक अभी भी दूर ही प्रतीत होता है।
वैचारिक स्वतंत्रता के आने के बाद भी सब कुछ सही हो जाएगा ऐसा नहीं है। लेकिन वैचारिक स्वतंत्रता का क्रियान्वन बदलाव लाएगा, इस बदलाव के लिए महत्वपूर्ण कदम वैचारिक बंधनों की ज़ंजीरों को तोड़ना है। फिलहाल , समय की मांग है वैचारिक स्वतंत्रता से क्रांति लाने की। जब तक स्वतंत्रता के साथ वैचारिक स्वतंत्रता का मिलाप नहीं होगा, तब तक दो ही प्रश्नों पर हम फंसे रह जाएंगे, क्या हम आज़ाद हैं ? और अगर हैं भी तो इस आज़ादी के मायने आखिर हैं क्या? और फिर वो आज़ादी भी आज़ादी कैसी, जो चंद प्रश्नों के भी उत्तर न दे पाए।
और हाँ.... स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं....... :D
-ऐश्वर्य

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